विलोम शब्द (हिंदी व्याकरण)

विलोम शब्द ( हिंदी व्याकरण) विलोम का अर्थ है ‘विपरीत’। शब्द भण्डार भाषा की विकसित अवस्था का सूचक होता है। किसी भाषा में एक प्रकार की स्थिति के लिए एक शब्द विशेष प्रचलित होता है, जबकि उससे विपरीत स्थिति का बोध कराने हेतु शब्द विशेष का प्रचलन होता है। इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता […]

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पर्यायवाची शब्द (हिंदी व्याकरण)

  पर्यायवाची शब्द अग्नि आग, अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु। अतिथि अभ्यागत, पाहुन, मेहमान, आगन्तुक । अमृत सुधा, सोम, पीयूष, अमी, अमिय, सुरभोग, देवभोग। अपमान अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, अवमान, तिरस्कार। अलंकार आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर। अश्व घोड़ा, हय, हरि, घोटक, बाजि, सैन्धव, तुरंग। असुर दनुज, दैत्य, दानव, राक्षस, तमचर, निशाचर, रजनीचर। अहंकार गर्व, दर्प,

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Rajasthan Board RBSE Class 6 Social Science Chapter 1 हमारा ब्रह्मांड

कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (Class 6 Social Science) भाग 1 – भूगोल अध्याय 1 हमारा ब्रह्मांड 1.आसमान में दिखाई देने वाले तारो के समूह को तारामंडल या नक्षत्र मंडल कहा जाता है। 2.भारत मेआसमान में दिखने वाले सात तारो के समूह को सप्त ऋषि मंडल के नाम सेजाना जाता है। 3.फ्रांस में चार तारो के

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History Class 11 Notes (कक्षा 11 इतिहास)

  History Class 11 Notes (कक्षा 11 इतिहास) सिंधु घाटी सभ्यता (Sindhu Ghati Sabhyata) ❖इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं। ❖यह कांस्य युगीन सभ्यता ❖चार्ल्स मेसन ने 1826 ई. में सबसे पहले इस सभ्यता की ओर ध्यान आकर्षित किया। ❖जॉन बर्टन व विलियम बर्टन – 1856 ई . में हड़प्पा का सर्वे किया। ❖कालक्रम –

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Ncert Class 9 Social Science (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

Ncert Class 9 Social Science (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान) अध्याय 01 विश्व की प्राचीन सभ्यताएं ❖भारत हजारों वर्ष पूर्व से ही सभ्यता सम्पन्न राष्ट्र रहा है। भारत की सभ्यता : – ❖भारत विश्व के सबसे प्राचीन देशों में से एक है। ❖भारत का इतिहास , इसकी सभ्यता तथा इसकी संस्कृति बहुत प्राचीन है। ❖आज से

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विश्व के प्रमुख दर्शन (Class 9 Samajik vigyan)

विश्व के प्रमुख दर्शन (Vishv ke pramukh darshn) 1. वैदिक दर्शन  ❖ वैदिक दर्शन भारत के सबसे प्राचीन दर्शनों में सबसे प्रमुख दर्शन । ❖ वैदिक दर्शन साहित्य में उपलब्ध। ❖  वैदिक साहित्य में – वेद , ब्राह्मण , संहिता , आरण्यक , उपनिषद (वेदांत) तथा वेदांग आते हैं। ❖ वेद विश्व का सबसे प्राचीन

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भारत के प्रधानमंत्री(Pradhanmatri)

प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद – Pradhanmatri of INDIA ❖ प्रधानमंत्री देश की राजनीतिक व्यवस्था की दूरी है इसे देश का हर देश तक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र राजनीतिक शासक और सर्वोच्च शासक की संज्ञा दी जाती है जहां राष्ट्रपति देश का औपचारिक किया संवैधानिक शासक हैं वहीं प्रधानमंत्री को देश का वास्तविक समझा जाता है। ❖ लार्ड

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नीति निर्देशक तत्त्व व मूल कर्त्तव्य

नीति निर्देशक तत्त्व एवं मूल कर्तव्य ❖ राज्य द्वारा जातिगत आधार पर भेदभाव न किया जाना प्रत्येक व्यक्ति को न्यूनतम आवश्यकताएं राज्य द्वारा प्रदान किया जाना। ❖ भारतीय संविधान के भाग 4 में नीति निर्देशक तत्वो में आर्थिक एवं सामाजिक न्याय की स्थापना की गई जो राज्य सरकार के दायित्व में है। ❖ डॉक्टर भीमराव

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प्रस्तावना

प्रस्तावना : संविधान की आत्मा ❖ हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य, बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की

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उपराष्ट्रपति(uprashtrapati)

उपराष्ट्रपति ❖संविधान का अनुच्छेद 63 यह कहता है कि भारत में एक उपराष्ट्रपति होना चाहिए। उपराष्ट्रपति बनने के लिए आवश्यक वही अहर्ताएँ निर्धारित की गई हैं, जोकि राष्ट्रपति के लिए हैं। उपराष्ट्रपति का चुनाव भी अप्रत्यक्ष, आनुपातिक प्रतिनिधित्व पध्दति के अनुसार एकल संक्रमण मत द्वारा होता है। ❖ राष्ट्रपति बनने के लिए किसी व्यक्ति को

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मंत्रिपरिषद

मंत्रिपरिषद ❖ संविधान का अनुच्छेद 74 यह कहता है कि प्रधानमंत्री के साथ एक मंत्रिपरिषद होगी। ये राष्ट्रपति की मदद करेंगे एवं उसे सलाह देंगे ।राष्ट्रपति इनकी सलाह से काम करेगा। ❖ संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किया जाएगा। दूसरे मंत्री राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह से नियुक्त

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संसद

संसद ❖संविधान का भाग-5 संसद से संबद्ध है। संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होनी चाहिए। इसमें सम्मिलित हैं : ❖भारत का राष्ट्रपति ❖दो सदन जिसमें राज्य परिषद ;राज्य सभा या उच्च सदन तथा लाेक सभा या निम्न सदन सम्मिलित हैं। ❖यह एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है कि राष्ट्रपति का बनाया

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भारतीय न्यायपालिका

सर्वोच्च न्यायालय ❖ भारत के संविधान के अंतर्गत एवं संवैधानिक पुनरावलोकन के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायाधिकरण है एवं यह अपील करने का अंतिम न्यायालय है। ❖ इसमें सर्वोच्च न्यायाधीश के साथ 30 अन्य न्यायाधीश सम्मिलित रहते हैं। ❖ इसके पास मूल, पुनर्विचार संबंधी एवं परामर्शदात्री अधिकारिता होती है। ❖ एक डिविजन बेंच में दो से तीन

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भाग 6 राज्य

भाग 6 राज्य (अनुच्छेद 152-237) राज्यपाल (अनुच्छेद 153-162) ❖ राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। (अनुच्छेद 155) ❖ भारतीय संसदीय प्रणाली के अंतर्गत राज्यपाल राज्य व्यवस्थापिका का अभिन्न अंग होता है। ❖ एक ही राज्यपाल एक से ज्यादा राज्यों में राज्यपाल का पदभार ग्रहण कर सकता है। (अनुच्छेद 153-162) ❖ संविधान के

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मौलिक अधिकार

मौलिक अधिकार    – संविधान का भाग 3 (अनुच्छेद -12 से 35) ❖ यह लोकतंत्र का हॉलमार्क माना जाता है। ❖ मोैलिक अधिकार व्यक्ति के साथ-साथ समाज के विकास के लिए भी बनाए गए हैं। ❖ इनकी प्रकृति न्याय प्रदान करने वाली है। (विधि के न्यायालय द्वारा ये वैधानिक रूप से लागू किए जा सकते

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भारतीय संविधान के स्रोत

भारतीय संविधान के स्रोत 1.भारत सरकार अधिनियम – ❖यह भारतीय संविधान का मुख्य स्रोत है। ❖हमारे संविधान के लगभग 2/3 अनुच्छेद इसी से लिये गए हैं। 2. ब्रिटेन –  ❖संसदीय शासन व्यवस्था ❖ केबिनेट व्यवस्था ❖सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना ❖राष्ट्रपति का अभिभाषण ❖रिट जारी करना ❖एकल नागरिकता ❖न्याय के समक्ष समानता ❖CAG की व्यवस्था ❖विधि

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अनुसूचियाँ

अनुसूचियाँ पहली अनुसूची – भारत के राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश। दूसरी अनुसूची – वेतनमान ( वेतन दो)  ❖ जिनका वेतन संचित निधि पर भारित हैं। ❖राष्ट्रपति , राज्यपाल , लोकसभा का अध्यक्ष व उपाध्यक्ष , राज्यसभा का सभापति व उपसभापति , सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश , उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ,CAG , संघ लोक

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रामधारी सिंह दिनकर

💠 मेरे प्रिय कवि – दिनकर💠 जन्म – 23 सितम्बर 1908 मृत्यु – 24अपैल 1974 क्रांतिकारी कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ हिन्दी के प्रसिद्ध कवियों में से एक राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को सिमरिया नामक स्थान पे हुआ। इनकी मृत्यु 24 अप्रैल, 1974 को चेन्नई) में हुई । जीवन परिचय

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Bharat ke Rashtrapati (भारत के राष्ट्रपति)

Bharat ke Rashtrapati (भारत के राष्ट्रपति) संघ (अनुच्छेद 51-151) भारत का राष्ट्रपति ❖अनुच्छेद 52 कहता है कि ‘भारत का एक राष्ट्रपति होगा।’ ❖अनुच्छेद 53 कहता है कि केन्द्र की समस्त कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होंगी। ❖भारत सरकार के समस्त कार्यपालिका संबंधी कार्य राष्ट्रपति के नाम से ही संचालित होते हैं। योग्यताएँ : ❖भारतीय संविधान

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संविधान के भाग (Part of constitution)

भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेद  अनुच्छेद 1-4 :- संघ एवं राज्य क्षेत्र । अनुच्छेद 5-11:- नागरिकता की प्राप्ति । अनुच्छेद 12-35 :– मूल अधिकारों का विनिर्देशन अनुच्छेद 36-51:- राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों का विनिर्देशन। अनुच्छेद 51-A :- नागरिकों के मूलभूत अधिकार अनुच्छेद 52-151 :- संघ अनुच्छेद 152-237 :- राज्य अनुच्छेद 239-242 :- संघ राज्य

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संविधान सभा (Constituent Assembly of India)

संविधान सभा (Constituent Assembly of India) ❖सर्वप्रथम 1935 ई. में कांग्रेस ने संविधान सभा की मांग की । ❖1940 ई. अगस्त प्रस्ताव – इसके तहत पहली बार ब्रिटिश सरकार द्वारा यह स्वीकार किया गया कि संविधान सभा मे भारतीय सदस्य होंगे और भारतीय सदस्य ही संविधान बनाएंगे। ❖1942 ई. क्रिप्स मिशन – इसके तहत पहली

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भक्ति आंदोलन

1. भक्ति आंदाेलन काे दक्षिण भारत से लाकर उत्तर भारत तक प्रचारित करने का श्रेय किसे दिया जाता है? (अ) शंकराचार्य (ब) रामानुज (स) रामानंद (द) कबीर 2. पुष्टि मार्ग के दर्शन की स्थापना किसने की ? (अ) चैतन्य ने (ब) नानक ने (स) सूरदास ने (द) वल्लभाचार्य ने 3. निम्न संतो का कालक्रमानुसार व्यस्थित

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सिंधु घाटी सभ्यता ( SINDHU GHATI SABHYATA QUIZ)

SINDHU GHATI SABHYATA QUIZ 1. सिन्धु घाटी सभ्यता निम्नलिखित में से किस सभ्यता के समकालीन नहीं थी? (अ) मिस्र की सभ्यता (ब) मेसाेपोटामिया की सभ्यता (स) चीन की सभ्यता (द) ग्रीक की सभ्यता 2. सिंधु घाटी की सभ्यता में घाेड़े के अवषेष कहाँ मिले है? (अ) सुरकाेटदा (ब) वणावली (स) माण्डा (द) कालीबंगा 3. सिंधु घाटी

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पद परिचय

वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक सार्थक शब्द को पद कहते हैं तथा उन शब्दों के व्याकरणिक परिचय को पद परिचय, पद व्याख्या या पदान्वय कहते हैं। पद परिचय में उस शब्द के भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक आदि के परिचय के साथ, वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों के साथ उसके सम्बन्ध का भी उल्लेख किया जाता

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लिंग

परिभाषा: विकारी शब्दों (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) में विकार उत्पन्न करने वाले कारकों को विकारक कहते हैं। लिंग, वचन, कारक, काल तथा वाच्य से शब्द के रूप में परिवर्तन होता है। लिंग लिंग शब्द का अर्थ होता है चिह्न या पहचान। व्याकरण के अन्तर्गत लिंग उसे कहते हैं, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द के स्त्री

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वचन

सामान्यतः वचन शब्द का प्रयोग किसी के द्वारा कहे गये कथन अथवा दिये गये आश्वासन के अर्थ में किया जाता है, किन्तु व्याकरण में वचन का अर्थ संख्या से लिया जाता है। वह, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। प्रकार: वचन दो प्रकार के होते हैं।

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कारक

परिभाषा: ‘कारक’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘करनेवाला’ किन्तु व्याकरण में यह एक पारिभाषिक शब्द है। जब किसी संज्ञा या सर्वनाम पद का सम्बन्ध वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों, विशेषकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं। विभक्ति: कारक को प्रकट करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ, जो चिह्न

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समास (हिंदी व्याकरण)

समास (हिंदी व्याकरण) परिभाषा: ‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘छोटा-रूप’ । अतः जब दो या दो से अधिक शब्द (पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर जो छोटा रूप बनाते हैं, उसे समास, सामासिक शब्द या समस्त पद कहते हैं। जैसे ‘रसोई के लिए घर’ शब्दों में से के लिए विभक्ति का

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संधि (हिंदी व्याकरण)

संधि (हिंदी व्याकरण) दो ध्वनियों के परस्पर मेल को संधि कहते हैं । सन्धि के तीन भेद हैं: 1.स्वर सन्धि 2.व्यंजन सन्धि 3.विसर्ग सन्धि (1) स्वर सन्धि – दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकास स्वर सन्धि कहलातीहै। स्वर सन्धि के पाँच भेद है – दीर्घ संधि – दो समान स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते

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प्रत्यय (हिंदी व्याकरण)

प्रत्यय परिभाषा: वे शब्दांश जो किसी शब्द के अन्त में लगकर उस शब्द के अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, अर्थात् नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। जैसे – समाज + इक = सामाजिक सुगन्ध + इत = सुगन्धित भूलना + अक्कड़ = भुलक्कड़ मीठा + आस = मिठास अतः प्रत्यय

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उपसर्ग

परिभाषा: वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व में लगकर नये शब्द का निर्माण करते हैं अर्थात् नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। ये शब्दांश होने के कारण वैसे इनका स्वतन्त्ररूप से अपना कोई महत्त्व नहीं होता किन्तु शब्द के पूर्व संश्लिष्ट अवस्था में लगकर उस शब्द विशेष के अर्थ

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शब्द विचार (रचना के आधार पर)

रचना के आधार पर: शब्दों की रचना प्रक्रिया के आधार पर हिन्दी भाषा के शब्दों के तीन भेद किये जाते हैं – (1) रूढ़ शब्द (2) यौगिक शब्द (3) योग रूढ़ शब्द (1) रूढ़ शब्द: वे शब्द जो किसी व्यक्ति, स्थान, प्राणी और वस्तु के लिए वर्षों से प्रयुक्त होने के कारण किसी विशिष्ट अर्थ

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शब्द विचार (तत्सम व तद्भव)

परिभाषा: एक या एक से अधिक वर्णों से बने सार्थक ध्वनि-समूह को शब्द कहते हैं। शब्द के भेद: शब्द की उत्पत्ति या स्रोत, रचना या बनावट, प्रयोग तथा अर्थ के आधर पर शब्दों के निम्न भेद किये जाते हैं – उत्पत्ति के आधार पर उत्पत्ति एवं स्रोत के आधार पर हिन्दी भाषा में शब्दों को

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वर्ण विचार

किसी भाषा के व्याकरण ग्रंथ में इन तीन तत्त्वों की विशेष एवं आवश्यक रूप से चर्चा/विवेचना की जाती है। 1.वर्ण 2.शब्द 3.वाक्य हिन्दी विश्व की सभी भाषाओं में सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा है। हिन्दी में 44 वर्ण हैं, जिन्हें दो भागों में बांटा जा सकता है- स्वर और व्यंजन। स्वर:- ऐसी ध्वनियाँ जिनका उच्चारण करने में

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प्रजामंडल(Prajamandal)

प्रजामंडल आंदोलन (Prajamandal) ❖ 1927 में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना । ❖ स्थापना – बॉम्बे ❖ अध्यक्ष – दीवान रामचंद्र राव ❖ उपाध्यक्ष विजय सिंह पथिक ❖ रामनारायण चौधरी को राजपूताना व मध्य प्रांत का सचिव बनाया गया । ❖ 1928 में राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना। १. प्रथम

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शब्द विचार

  1.सभी प्रश्न करने अनिवार्य है। 2.नकारात्मक अंक नही है। 3.प्रश्नों के उत्तर टेस्ट देने के बाद दिखाई देंगे। 4.आप अपना व दोस्तो की रैंक के साथ परिणाम देख सकते हो। 5.टेस्ट शुरू करने के लिए QUIZ START पर क्लिक करे। [WpProQuiz 88]  [WpProQuiz_toplist 88]  

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सल्तनत कालीन भारत

सल्तनत कालीन भारत  दिल्ली सल्तनत (1206 – 1526) 1.गुलाम वंश   – 1206 – 1290 ई. 2.खिलजी वंश – 1290 – 1320 ई. 3.तुगलक वंश – 1320 – 1414 ई . 4.सैय्यद वंश –   1414 – 1451 ई. 5.लोदी वंश –    1451 – 1526 ई. 712 ई. मुहम्मद बिन कासिम व सिंध के राजा दाहिर

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भारत का सामान्य परिचय

❖भारत का प्राचीन नाम उत्तर भारत में बसने वाले आर्यो के नाम पर आर्यावर्त किया गया। ❖इन आर्यो के शक्तिशाली राजा भरत के नाम पर यह भारत कहलाया। ❖वैदिक आर्यो का निवास स्थान सिंधु घाटी में था। जिसे ईरानियों ने हिन्दु नदी तथा इस देश को हिन्दुस्थान कहा। ❖यूनानीयों ने सिन्धु नदी को इण्डस तथा

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मानव श्वसन तंत्र(Human Respiratory system)

1.श्वसन – कार्बन डाई ऑक्साइड व ऑक्सीजन का विनियम जो पर्यावरण ,रक्त और कोशिकाओं के मध्य होता है ,को श्वसन कहा जाता है।रक्त ऑक्सीजन युक्तं शुद्ध वायु को कोशिकाओं तक पहुँचाता है तथा कोशिकाओं द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कर फेफड़ो के द्वारा वायुमण्डल में छोड़ता है। 2.मानव श्वसन तंत्र – मानव श्वसन तंत्र

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