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मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)

पाचन तंत्र क्या है भोजन के जटिल पोषक पदार्थो व बड़े अणुओ को विभिन्‍न रासायनिक क्रियाओ और एंजाइम की सहायता से सरल, छोटे व घुलनशील अणुओं में बदलना पाचन कहलाता है, तथा जो तंत्र यह कार्य करता है, पाचन तंत्र कहलाता है। पाचन तंत्र वर्गीकरण मानव पाचन तंत्र (Digestive System) को दो भागों में बताया […]

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Class 12 History Of India : भारत का इतिहास Part -1

Class 12 History of India , Bharat ka ithas ,भारत का इतिहास  1.नारायण की उपाधि किस गुर्जर प्रतिहार शासक को दी गई थी? A.नागभट्ट प्रथम को B.वत्सराज को C.नागभट्ट द्वितीय को D.महेन्द्रपाल को Show Answer A. नागभट्ट प्रथम को व्याख्यान – ग्वालियर प्रशस्ति में नागभट्ट प्रथम को मलेच्छो का दमनकारक और दीनों का उध्दारक होने

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प्रागैतिहासिक काल

प्रागैतिहासिक काल प्रागैतिहासिक वह वह काल है, जिसके अध्ययन के लिए पुरातात्विक सामग्री तो उपलब्ध है, किंतु लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इस समय आदमी, आदमी की तरह तो था लेकिन आदमी नहीं था। पुरातात्विक सामग्रियों की काल गणना के लिए कार्बन-14  विधि का प्रयोग करते रहते हैं। इसके पिछे सिद्धांत यह है कि सौर

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भारत मे अरबो का आक्रमण

भारत में अरबों का आक्रमण लगभग 623 ई. में हजरत मुहम्मद की मृत्यु के उपरान्त 6 वर्षों के अन्दर ही उनके उत्तराधिकारियों ने सीरिया, मिस्त्र, उत्तरी अफ्रीका, स्पेन एवं ईरान को जीत लिया। इस समय खलीफा साम्राज्य फ्रांस के लायर नामक स्थान से लेकर आक्सर एवं काबुल नदी तक फैल गया था। अपने इस विजय

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यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का भारत आगमन

17 वीं शताब्दी के दौरान भारत विदेशी व्यापार का एक ऐसा आकर्षण केंद्र बन गया था कि हर विदेशी राष्ट्र व्यापार के माध्यम से उस पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता था क्योंकि भारत औद्योगिक माल के उत्पादन में एक अग्रणी राष्ट्र था। यहां का उच्च कोटि का सूती एवं रेशमी कपड़ा ,मसाले, नील, शक्कर, औषधियां

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गुप्त काल(GUPT KAL)

गुप्तकाल(GUPT KAL) श्री गुप्त (240 – 280 ई•) ⇒गुप्त वंश का संस्थापक। ⇒गुप्त वंश का आदिपुरुष। घटोत्कच (280 – 319 ई•) चंद्रगुप्त (319 – 335 ई•) ⇒गुप्त वंश का वास्तविक संस्थापक। ⇒319 ई• में गुप्त संवत चलाया। ⇒महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। ⇒लिच्छवि राजकुमारी कुमार देवी से विवाह किया तथा कुमार देवी का नाम सिक्कों

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नीति निर्देशक तत्त्व व मूल कर्त्तव्य

नीति निर्देशक तत्त्व एवं मूल कर्तव्य ❖ राज्य द्वारा जातिगत आधार पर भेदभाव न किया जाना प्रत्येक व्यक्ति को न्यूनतम आवश्यकताएं राज्य द्वारा प्रदान किया जाना। ❖ भारतीय संविधान के भाग 4 में नीति निर्देशक तत्वो में आर्थिक एवं सामाजिक न्याय की स्थापना की गई जो राज्य सरकार के दायित्व में है। ❖ डॉक्टर भीमराव

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मंत्रिपरिषद

मंत्रिपरिषद ❖ संविधान का अनुच्छेद 74 यह कहता है कि प्रधानमंत्री के साथ एक मंत्रिपरिषद होगी। ये राष्ट्रपति की मदद करेंगे एवं उसे सलाह देंगे ।राष्ट्रपति इनकी सलाह से काम करेगा। ❖ संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किया जाएगा। दूसरे मंत्री राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह से नियुक्त

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संसद

संसद ❖संविधान का भाग-5 संसद से संबद्ध है। संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होनी चाहिए। इसमें सम्मिलित हैं : ❖भारत का राष्ट्रपति ❖दो सदन जिसमें राज्य परिषद ;राज्य सभा या उच्च सदन तथा लाेक सभा या निम्न सदन सम्मिलित हैं। ❖यह एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है कि राष्ट्रपति का बनाया

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भारतीय न्यायपालिका

सर्वोच्च न्यायालय ❖ भारत के संविधान के अंतर्गत एवं संवैधानिक पुनरावलोकन के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायाधिकरण है एवं यह अपील करने का अंतिम न्यायालय है। ❖ इसमें सर्वोच्च न्यायाधीश के साथ 30 अन्य न्यायाधीश सम्मिलित रहते हैं। ❖ इसके पास मूल, पुनर्विचार संबंधी एवं परामर्शदात्री अधिकारिता होती है। ❖ एक डिविजन बेंच में दो से तीन

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भाग 6 राज्य

भाग 6 राज्य (अनुच्छेद 152-237) राज्यपाल (अनुच्छेद 153-162) ❖ राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है। (अनुच्छेद 155) ❖ भारतीय संसदीय प्रणाली के अंतर्गत राज्यपाल राज्य व्यवस्थापिका का अभिन्न अंग होता है। ❖ एक ही राज्यपाल एक से ज्यादा राज्यों में राज्यपाल का पदभार ग्रहण कर सकता है। (अनुच्छेद 153-162) ❖ संविधान के

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मौलिक अधिकार

मौलिक अधिकार    – संविधान का भाग 3 (अनुच्छेद -12 से 35) ❖ यह लोकतंत्र का हॉलमार्क माना जाता है। ❖ मोैलिक अधिकार व्यक्ति के साथ-साथ समाज के विकास के लिए भी बनाए गए हैं। ❖ इनकी प्रकृति न्याय प्रदान करने वाली है। (विधि के न्यायालय द्वारा ये वैधानिक रूप से लागू किए जा सकते

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भारतीय संविधान के स्रोत

भारतीय संविधान के स्रोत 1.भारत सरकार अधिनियम – ❖यह भारतीय संविधान का मुख्य स्रोत है। ❖हमारे संविधान के लगभग 2/3 अनुच्छेद इसी से लिये गए हैं। 2. ब्रिटेन –  ❖संसदीय शासन व्यवस्था ❖ केबिनेट व्यवस्था ❖सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना ❖राष्ट्रपति का अभिभाषण ❖रिट जारी करना ❖एकल नागरिकता ❖न्याय के समक्ष समानता ❖CAG की व्यवस्था ❖विधि

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अनुसूचियाँ

अनुसूचियाँ पहली अनुसूची – भारत के राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश। दूसरी अनुसूची – वेतनमान ( वेतन दो)  ❖ जिनका वेतन संचित निधि पर भारित हैं। ❖राष्ट्रपति , राज्यपाल , लोकसभा का अध्यक्ष व उपाध्यक्ष , राज्यसभा का सभापति व उपसभापति , सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश , उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ,CAG , संघ लोक

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पद परिचय

वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक सार्थक शब्द को पद कहते हैं तथा उन शब्दों के व्याकरणिक परिचय को पद परिचय, पद व्याख्या या पदान्वय कहते हैं। पद परिचय में उस शब्द के भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक आदि के परिचय के साथ, वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों के साथ उसके सम्बन्ध का भी उल्लेख किया जाता

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लिंग

परिभाषा: विकारी शब्दों (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) में विकार उत्पन्न करने वाले कारकों को विकारक कहते हैं। लिंग, वचन, कारक, काल तथा वाच्य से शब्द के रूप में परिवर्तन होता है। लिंग लिंग शब्द का अर्थ होता है चिह्न या पहचान। व्याकरण के अन्तर्गत लिंग उसे कहते हैं, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द के स्त्री

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वचन

सामान्यतः वचन शब्द का प्रयोग किसी के द्वारा कहे गये कथन अथवा दिये गये आश्वासन के अर्थ में किया जाता है, किन्तु व्याकरण में वचन का अर्थ संख्या से लिया जाता है। वह, जिसके द्वारा किसी विकारी शब्द की संख्या का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। प्रकार: वचन दो प्रकार के होते हैं।

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कारक

परिभाषा: ‘कारक’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘करनेवाला’ किन्तु व्याकरण में यह एक पारिभाषिक शब्द है। जब किसी संज्ञा या सर्वनाम पद का सम्बन्ध वाक्य में प्रयुक्त अन्य पदों, विशेषकर क्रिया के साथ जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं। विभक्ति: कारक को प्रकट करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ, जो चिह्न

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उपसर्ग

परिभाषा: वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पूर्व में लगकर नये शब्द का निर्माण करते हैं अर्थात् नये अर्थ का बोध कराते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। ये शब्दांश होने के कारण वैसे इनका स्वतन्त्ररूप से अपना कोई महत्त्व नहीं होता किन्तु शब्द के पूर्व संश्लिष्ट अवस्था में लगकर उस शब्द विशेष के अर्थ

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शब्द विचार (रचना के आधार पर)

रचना के आधार पर: शब्दों की रचना प्रक्रिया के आधार पर हिन्दी भाषा के शब्दों के तीन भेद किये जाते हैं – (1) रूढ़ शब्द (2) यौगिक शब्द (3) योग रूढ़ शब्द (1) रूढ़ शब्द: वे शब्द जो किसी व्यक्ति, स्थान, प्राणी और वस्तु के लिए वर्षों से प्रयुक्त होने के कारण किसी विशिष्ट अर्थ

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शब्द विचार (तत्सम व तद्भव)

परिभाषा: एक या एक से अधिक वर्णों से बने सार्थक ध्वनि-समूह को शब्द कहते हैं। शब्द के भेद: शब्द की उत्पत्ति या स्रोत, रचना या बनावट, प्रयोग तथा अर्थ के आधर पर शब्दों के निम्न भेद किये जाते हैं – उत्पत्ति के आधार पर उत्पत्ति एवं स्रोत के आधार पर हिन्दी भाषा में शब्दों को

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भारत का सामान्य परिचय

❖भारत का प्राचीन नाम उत्तर भारत में बसने वाले आर्यो के नाम पर आर्यावर्त किया गया। ❖इन आर्यो के शक्तिशाली राजा भरत के नाम पर यह भारत कहलाया। ❖वैदिक आर्यो का निवास स्थान सिंधु घाटी में था। जिसे ईरानियों ने हिन्दु नदी तथा इस देश को हिन्दुस्थान कहा। ❖यूनानीयों ने सिन्धु नदी को इण्डस तथा

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मानव श्वसन तंत्र(Human Respiratory system)

1.श्वसन – कार्बन डाई ऑक्साइड व ऑक्सीजन का विनियम जो पर्यावरण ,रक्त और कोशिकाओं के मध्य होता है ,को श्वसन कहा जाता है।रक्त ऑक्सीजन युक्तं शुद्ध वायु को कोशिकाओं तक पहुँचाता है तथा कोशिकाओं द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कर फेफड़ो के द्वारा वायुमण्डल में छोड़ता है। 2.मानव श्वसन तंत्र – मानव श्वसन तंत्र

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