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Ncert Class 9 Social Science (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

Ncert Class 9 Social Science (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

अध्याय 01 विश्व की प्राचीन सभ्यताएं

❖भारत हजारों वर्ष पूर्व से ही सभ्यता सम्पन्न राष्ट्र रहा है।

भारत की सभ्यता : –

❖भारत विश्व के सबसे प्राचीन देशों में से एक है।

❖भारत का इतिहास , इसकी सभ्यता तथा इसकी संस्कृति बहुत प्राचीन है।

❖आज से लगभग पाँच – सात हजार वर्ष पहले भारत प्रमुख नदियों जैसे सरस्वती , सिंधु व उसकी सहायक नदियों के किनारे बस्तियाँ बसा कर रहना आरम्भ कर दिया था।

❖सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत के कैलाश मानसरोवर के उत्तर में स्थित सेन्गेखबब , सिंहमुख व हिमनद से माना जाता है।

❖सरस्वती नदी का उद्गम शिवालिक की पहाड़ियों से माना जाता है।

❖यहां से यह आदिबद्री के पास मैदान में प्रवेश करती है तथा दक्षिण – पश्चिम दिशा में बहती हुई कुरुक्षेत्र ,घग्घर , हाकड़ा होती हुई हरियाणा के सिरसा के पास राजस्थान के नोहर में प्रवेश करती थी।

❖बीकानेर जैसलमेर होती हुई गुजरात के कच्छ के रन में प्रवेश कर प्रभास पत्तन के पास समुद्र में गिरती थी।

❖वर्तमान में सरस्वती नदी भौतिक रूप से अस्तित्व में नही है।

❖सरस्वती नदी आज भी अन्तः सलिला के रूप में प्रवाहित है।

❖वैदिक साहित्य, रामायण व महाभारत में सरस्वती नदी के अस्तित्व के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध होते हैं।

❖महाभारत युध्द के समय कृष्ण के भाई बलराम ने सरस्वती नदी पर स्थित तीर्थों की यात्रा की थी।

❖राजस्थान के मरुप्रदेश में भी सरस्वती नदी के किनारे बसे कई नगरों के पुरातात्विक अवशेष आज भी विद्यमान है ।

❖कालीबंगा उनमे से एक है।

❖सिंधु सरस्वती सभ्यता का काल – 3250 से 2750 ईसा पूर्व तक चरम विकास पर था।

सिंधु – सरस्वती सभ्यता का उत्खनन

❖सन 1921 ई.में रायबहादुर दयाराम साहनी ने पंजाब के मोटगोमरी जिले में हड़प्पा नामक कस्बे के पास रावी नदी के किनारे एक पुरातात्विक टीले की खोज की।

❖सन 1922 ई. में सिंध के लरकाना जिले में बहने वाली सिंधु नदी के पुर्वी किनारे पर स्थित मोहनजोदड़ो नामक टीले की खोज की।

❖मोहनजोदड़ो का अर्थ – मुर्दो का टीला

❖इस टीले की खुदाई से नौ बार बसने और नौ बार उजड़ने के अवशेष मिले।

❖सिंधु सरस्वती सभ्यता से संबंधित अब तक 1500 स्थल खोजे गए हैं , जिसमे से 900 स्थल भारत मे व 600 स्थल पाकिस्तान में है।

❖सन 1947 में भारत विभाजन के बाद सिंधु सरस्वती सभ्यता के कुछ बड़े स्थल – हड़प्पा , मोहनजोदड़ो , गनवेरिवाला आदि पाकिस्तान में चले गए।

❖कालीबंगा ,राखीगढ़ी ,धौलावीरा , लोथल ,रंगपुर आदि बड़े पुरातात्विक स्थल भारत में है।

❖सन 1953 ई. में अमलानंद घोष ने राजस्थान के बीकानेर संभाग में लगभग 25 पुरातात्विक स्थलों की खोज की , जिसमे कालीबंगा प्रमुख़ है।

सिंधु – सरस्वती सभ्यता की विशेषताएँ

(अ) नगर नियोजन – 

❖विकसित और उन्नत स्तर को प्रकट करने वाले अवशेषों में सबसे महत्वपूर्ण ।

❖हड़प्पा , मोहनजोदड़ो ,कालीबंगा , राखीगढ़ी तथा धौलावीरा लोथल के अवशेष सबसे महत्वपूर्ण है।

(1.)नगर की आवाज़ योजना – 

❖सभी मकानों में पानी रखने के फिरोने या परेड , शौचालय और स्नानघर अलग से निर्मित होते हैं।

(2.)सड़क व्यवस्था – 

❖सड़के पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की तरफ सीधी समान्तर ।

❖सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थी।

❖बड़ी सड़के 10 मीटर , छोटी सड़के 5 मीटर तथा गलियाँ एक से दो मीटर चौड़ी।

❖सड़को के किनारों पर स्थान स्थान पर कूड़ा कचरा डालने के कूड़ादान ।

(3.)नगर की सफाई , जल निकास प्रणाली और स्वच्छता का प्रबंध –

❖नगरों के मकानों में स्वच्छता और सफाई की समुचित व्यवस्था।

❖मकानों , मोहल्लों व नगर से गंदा पानी बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था।

(4.)विशेष निर्मितियाँ –

❖नगर की गढ़ी वाले भाग में रक्षा प्राचीर ।

❖धातु पिघलाने के स्थान।

❖भट्टियाँ , यज्ञ , वेदियाँ , विशाल स्नानागर तथा विशाल अन्नागार।

(आ) सामाजिक जीवन : –

❖व्याक्ति अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न कार्य कर सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखने में अपना योगदान ।

❖धार्मिक , प्रशासनिक , चिकित्सा ,सुरक्षा व उत्पादन प्रमुख कार्य।

(इ) परिवार व्यवस्था

❖समाज की प्रमुख इकाई – परिवार

❖परिवार में नारी को सम्मानजनक स्थान ।

❖पर्दा प्रथा प्रचलित नही थी।

❖स्त्रियाँ चाँदी व ताँबे के आभूषण पहनती थी।

❖लोग सूती वस्त्र पहनते थे। 

❖अस्त्र – शस्त्र का ज्ञान था।

❖मनोरंजन के साधनों में संगीत , नृत्य व शिकार प्रमुख थे।

❖गेंहूँ , जौ , चावल ,दूध तथा माँसाहार का भोजन का उपयोग।

(ई) आर्थिक जीवन :- 

(1.)कृषि व पशुपालन –

❖कालीबंगा में जुटे हुए खेत के अवशेष ।

❖गेहूँ , जौ ,चावल , तिल की खेती।

❖कृषि के साथ पशुपालन ।

❖पशुओ में गौ वश का महत्व।

(2.) व्यापार व वाणिज्य – 

❖ताँबे व कांसे के बर्तन व औजार बनाने के साथ मिट्टी के बर्तन व मटके में निपुण ।

❖चन्हूदड़ों तथा कालीबंगा की खुदाई में तोल के अनेक बाट मिले।

❖मोहनजोदड़ो में सीप की एक टूटी पट्टी (स्केल ) प्राप्त।

❖लोथल में खुदाई में निकाली एक गोदी (बन्दरगाह)  के अवशेष।

(उ) धार्मिक जीवन :

❖ प्राकृतिक शक्तियाँ के उपासक ।

❖ पृथ्वी , पीपल , नीम , जल , सूर्य , अग्नि आदि को देवी शक्ति मानकर उपासना ।

❖ बलि प्रथा तथा जादू – टोना प्रचलित ।

❖ अग्नि पूजा का प्रचलन ।

❖ मूर्तियों की उपासना के लिए धूप जलाई जाती थी।

❖ मातृ देवी व शिव की उपासना ।

❖ मृतक संस्कार शव को गाढ़कर या दाह कर्म करके दिया जाता था।

(ऊ) सभ्यता का अवसान – 

❖ इस सभ्यता का पतन प्राकृतिक कारणों से हुआ।

वैदिक सभ्यता 

❖सिंधु सभ्यता के अवसान के पश्चात वैदिक सभ्यता का उदय।

❖आर्य वैदिक सभ्यता के जनक।

वैदिक साहित्य 

❖आर्यो ने जिस साहित्य की रचना की उसे वैदिक साहित्य कहते है।

❖प्रमुख वैदिक साहित्य – वेद , ब्राह्मण , उपनिषद , आरण्यक ,षट वेदांग ।

❖वेद चार – ऋग्वेद , सामवेद , यजुर्वेद , अथर्ववेद।

वैदिक साहित्य की विशेषताएं –

(अ) राजनैतिक संगठन – 

❖वैदिक काल मे राजनीति जीवन का आधार – परिवार था ।

❖कई परिवारों से मिलकर ग्राम बनते थे

❖ग्रामों के समूह को जन । जन के नेता को गोप रक्षक या राजन कहते थे।

❖शासन का सर्वोच्च अधिकारी राजन होता था।

❖समिति , सभा व मंत्रणा नामक जनतांत्रिक संस्थाएं  राजन का सहयोग करती थी।

(आ) सामाजिक जीवन 

(1.) वर्ण व्यवस्था – 

❖वर्ण चार -ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य व शुद्र।

❖वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित न होकर कर्म पर आधारित थी।

(2.) परिवार –

❖समाज की मूल इकाई परिवार ।

❖संयुक्त परिवार की प्रधानता।

❖परिवार में सबसे बड़ा पुरुष मुखिया होता था। उसे गृहपति कहा जाता था।

❖स्त्रियों का बहुत समान , पर्दा प्रथा का प्रचलन नही।

❖गार्गी ,मैत्रेयी , गंधर्व ग्रहीता आदि विदुषी महिलाएं।

(3.) आश्रम व संस्कार व्यवस्था

❖ वैदिक काल मे सामाजिक संचालन के लिए आश्रम व्यवस्था प्रचलित।

❖ मनुष्य की आयु 100 वर्ष मानकर जीवन को चार कालों में विभाजित – ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ व सन्यास ।

❖ इस काल मे 16 संस्कारों का विधान ।

(इ) भोजन , वेशभूषा व मनोरंजन – 

❖ जौ , गेंहू , चावल ,उड़द , दूध ,दही का प्रयोग।

❖ सूती , ऊनी और रेशमी वस्त्रो का प्रयोग ।

❖ स्त्री व पुरुष दोनों आभूषण पहनते थे।

❖ आभूषणों में कर्ण – फूल , कण्ठहार , कंगन आदि।

❖ रथदौड़ , घुड़दौड़ ,शिकार व मलयुद्ध मनोरंजन के प्रमुख साधन ।

(ई) आर्थिक जीवन 

(1.) कृषि व पशुपालन – 

❖ वैदिक काल मे आजीविका के मुख्य साधन – कृषि , पशुपालन , घरेलू उद्योग – धंधे , व्यापार व वाणिज्य।

❖ बैल से खेती का कार्य किया जाता है।

❖ गाय , हाथी , घोड़ा , भैस , हिरण , भेड़ , बकरी व गधा प्रमुख पालतू पशु।

❖ गाय को प्रमुख व पालतू पशु ।

(2.) उद्योग व व्यापार – 

❖ लकड़ी , धातु , वस्त्र व चमड़े के प्रमुख उद्योग।

❖ गाय को मूल्य की इकाई माना जाता था।

❖ ऋग्वेद में निष्क नामक सोने के सिक्के के संकेत ।

(उ) धार्मिक जीवन 

❖ प्रकृति के उपासक ।

❖ इंद्र , सूर्य , अग्नि , वायु , ऊषा , वरुण प्रमुख देवता ।

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ – 

कालीबंगा 

❖ घग्घर नदी के किनारे सिंधु सरस्वती सभ्यता के 25 स्थल खोजे गए जिसमे कालीबंगा प्रमुख।

❖ हनुमानगढ़ में सरस्वती के तट पर 4500 वर्ष पहले बसा हुआ ।

❖ नगर योजना के दो टीले प्राप्त – पूर्वी टीला में साधारण बस्ती व पश्चिमी टीले में दुर्ग ।

❖ दोनो टीलो के चारो ओर सुरक्षा प्राचीर ।

❖ जूते हुए खेत के साक्ष्य ।

❖ अग्निवेदियो के साक्ष्य ।

❖ धूप से पकाई गई ईंटों का प्रयोग ।

❖ नगर योजना सिंधु घाटी की नगर योजना के अनुरूप ।

❖ मृतक के प्रति श्रद्धा तथा धार्मिक भावनाओं को व्यक्त करने वाली तीन समाधियाँ ।

आहड़ 

❖ कांस्य युगीन संस्कृति का प्रमुख  केंद्र।

❖ संस्कृति बेड़च बनास घाटियों में विकसित ।

❖ पांच हजार वर्ष पुरानी सभ्यता ।

❖ 500 मीटर लम्बे धूलकोट का टीला आहड़ सभ्यता का प्रमुख केंद्र।

❖ ताँबे की कुल्हाड़ियाँ , प्रस्तर के औजार , अर्ध कीमती प्रस्तर की वस्तुएँ आदि प्राप्त।

❖ 4 से 6 बड़े चूल्हें प्राप्त ।

बालाथल 

❖ उदयपुर से पूर्व में 42 किलोमीटर दूर ऊँठाला गांव में वल्लभ नगर नाम से बसा।

❖ यह सभ्यता लगभग 3200 ई. पु. तक अस्तित्व में आई ।

बालाथल की विशेषताएँ – 

(अ) ताम्र – उपकरण 

❖ताँबे के बने हुए उपकरण और अस्त्रों का प्रयोग।

❖ ताँबे की कुल्हाड़ी , चाकू , छैनी , उस्तरा तथा बाण के फलक का प्रयोग।

(आ) मिट्टी के बर्तन – 

❖मिट्टी के बर्तन दो तरह के प्राप्त हुए 1.खुरदरी दीवारों वाले मिट्टी के बर्तन 2. चिकनी मिट्टी की दीवारों वाले मिट्टी के बर्तन ।

(इ) निर्माण कार्य – 

❖बालाथल की खुदाई में ग्यारह कमरों के बड़े भवन की रचना प्राप्त हुई जो ताम्र पाषाण काल की द्वितीय अवस्था मे निर्मित हुयर।

4. चंद्रावती 

❖ सिरोही जिले में माउंट आबू की तलहटी में चंद्रावती नगर में स्थित ।

❖ सेवाणी नदी के तट पर अवस्थित ।

❖ इसकी खोज 1822 ई . कर्नल टॉड द्वारा की गई।

❖ सन 1980 ई. में महाराजा सियाजीराव गायकवाड़ विश्वविद्यालय , बडौदा के पुरातात्विक विभाग द्वारा गहन सर्वेक्षण किया गया।

❖चंद्रावती के अभिलेख तथा ताम्रपट माउंट आबू संग्रहालय में सुरक्षित।

Ncert Class 9 Social Science (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)

अध्याय 2  विश्व के प्रमुख दर्शन

अध्याय 3 प्राचीन भारत और विश्व

अध्याय 4 भारत मे सामाजिक सुधार और धार्मिक पुनर्जागरण

 

 

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