संसद

संसद

❖संविधान का भाग-5 संसद से संबद्ध है। संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होनी चाहिए। इसमें सम्मिलित हैं :
❖भारत का राष्ट्रपति
❖दो सदन जिसमें राज्य परिषद ;राज्य सभा या उच्च सदन तथा लाेक सभा या निम्न सदन सम्मिलित हैं।
❖यह एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है कि राष्ट्रपति का बनाया जाना संसद की एक प्रक्रिया है। यह सरकार के संसदीय रूप के समरूप है।
❖संसद का काम-काज या तो हिंदी में या अंग्रेजी में सम्पादित हाेता है। फिर भी उसके सदस्यों को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वे सदन को अपनी मातृभाषा में संबोधित करें।

राज्य सभा (राज्य परिषद)

❖संसद के उच्च सदन को राज्य सभा के नाम से जाना जाता है।
❖इसका गठन 03 अप्रैल, 1952 को तथा पहली बैठक 13 मई 1952 को संपन्न हुई।
❖संविधान का अनुच्छेद 80 संसद के उच्च सदन के तौर पर राज्य सभा का उल्लेख करता है।
❖राज्य सभा में अधिकतम 250 सदस्य होंगे।
❖राज्य सभा की वर्तमान सदस्य संख्या 245 है। इसमें से 233 सदस्य राज्य एवं दिल्ली तथा पांडिचेरी संघशासित क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं। 12 सदस्य राष्ट्रपति के द्वारा नामित किए जाते हैं।
❖राष्ट्रपति के द्वारा नामित सदस्य ऐसे व्यक्ति होते हैं जिनको साहित्य, विज्ञान, कला एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
❖संविधान की चाैथी अनुसूची राज्य सभा में राज्य एवं संघशासित क्षेत्रों को सीटें प्रदान करती है।
❖सीटों का आवंटन प्रत्येक राज्य की जनसंख्या के आधार पर किया जाता है।
❖राज्यसभा, लोकसभा के साथ संयुक्त रूप से कानून बनाती है, संविधन में संशोधन करती है।
❖राज्य सभा कभी विघटित नहीं होती है। राज्य सभा के सदस्य छः वर्ष के लिए निर्वाचित किए जाते हैं।
❖राज्य सभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक 2 वर्ष में अवकाश ग्रहण करते हैं एवं उनके स्थान पर नए सदस्य निर्वाचित किए जाते हैं।
❖अवकाश ग्रहण करने वाले सदस्य पुनर्निर्वाचित किए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति को राज्य सभा का सदस्य बनने के लिए
1. उसे भारत का नागरिक होना चाहिए।
2. उसे कम-से-कम तीस वर्ष का होना चाहिए।

❖राज्य सभा की एक सत्र की अंतिम बैठक तथा अगले सत्र की प्रथम बैठक में छः महीने से अधिक का अंतराल नहीं हाेना चाहिए।
❖राष्ट्रपति वर्ष में कम से कम दो बार राज्य सभा का अधिवेशन आहूत कर सकता है एवं संसद के सदनों का सत्रावसान कर सकता है।
❖राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है। वह राज्यसभा को भंग नहीं कर सकता है चूँकि यह संसद का स्थायी सदन होता है।

लोक सभा
❖लोकसभा को निम्न सदन या लोगाें का सदन कहते हैं।
❖लोक सभा संसद का लाेकप्रिय सदन होता है। इसका कारण यह है कि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा निर्वाचित हाेते हैं।
❖सामान्यतया लोकसभा के तीन वार्षिक सत्र आयोजित हाेते हैं। इनको बजट सत्र, मानसून सत्र एवं शीतकालीन सत्र कहते हैं।
❖संसद का बजट सत्र तीनों सत्रों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण एवं सबसे लम्बा सत्र हाेता है। सामान्यतया यह पफरवरी के तृतीय सप्ताह में शुरू होता है एवं मई के मध्य में इसका सत्रावसान होता है।
❖संसद का मानसून सत्र जुलाई के मध्य में शुरू होता है एवं अगस्त के तृतीय सप्ताह में इसका सत्रावसान होता है।
❖संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के मध्य में शुरू होता है एवं दिसंबर के अंतिम सप्ताह में इसका सत्रावसान होता है।
❖संसद के दाे एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्यों के सिवाय संसद में सभी सदस्यों को सामान्यतया निर्वाचित किया जाता है। दो एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य राष्ट्रपति के द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं।
❖संविधान में यह प्रावधान रखा गया है कि इसमें सदस्यों की संख्या 552 से अधिक नहीं हो सकती। इनमें से 530 सदस्य राज्याें से, 20 संघशासित क्षेत्रों से एवं 02 एंग्लाे- इंडियन समुदाय से नामांकित किए जाते हैं।
❖इनमें 543 निर्वाचन क्षेत्रों के लाेगों में प्रतिनिधि, वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष मतदान के द्वारा चुने जाते हैं। ये सभी सदस्य संसद भवन, नई दिल्ली के लोक सभा कक्षों में एक-दूसरे से मिलते हैं।
❖संविधान के अनुच्छेद 81 के अंतर्गत राज्यों से 530 से अधिक सदस्य, संघशासित क्षेत्रों से 20 से अधिक सदस्य एवं एंग्लाे- इंडियन समुदाय के दो से अधिक सदस्य सम्मिलित नहीं हाेंगे। (अनुच्छेद 331) कुलः 552
❖वर्तमान नियमाें के अंतर्गत लाेकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 545 है। इनमें एंग्लो-इंडियन समुदाय की 02 आरक्षित सीटें सम्मिलित हैं।
❖कुल उपलब्ध 131 सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति के लिए एवं 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधियाें हेतु आरक्षित रहती हैं।
❖सन् 2014 में संपन्न हुए 16 वीं लोक सभा के निर्वाचनों में भारतीय जनता पार्टी (एन॰ डी॰ ए॰ का घटक) को 543 सीटों में से 282 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिला था।
❖संविधान लोकसभा काे यह अधिकार देता है कि वह शक्ति काे पुनर्संयोजित करे।
❖सत्तारूढ़ दल के बाद सबसे ज्यादा सदस्यों वाली एवं लोक सभा की सदस्य-संख्या का 1/10 भाग रखने वाली पार्टी को विरोधी दल के नाम से जाना जाता है।
❖वर्तमान में सदस्य-संख्या के हिसाब से उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च स्थान है। इसके बाद महाराष्ट्र एवं फिर पश्चिम बंगाल का नाम आता है। यू॰ पी॰ में 82, महाराष्ट्र में 48, पश्चिम बंगाल में 42, आन्ध्र प्रदेश में 42 एवं तमिलनाडु में 39 लोक सभा सदस्य हैं।
❖मतदानः लाेक सभा के सदस्य वयस्क मताधिकार के द्वारा सीधे निर्वाचित किए जाते हैं। सिक्किम के मामले में लोक सभा में इसके प्रतिनिधि इसकी विधान सभा सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं। अनुच्छेद 371 f (e)

योग्यताएँ :

संविधान का अनुच्छेद 84 हमें यह बताता है कि संसद की सदस्यता के लिए क्या योग्यता हाेती है। इसके अनुसार-

❖उसे भारत का नागरिक हाेना चाहिए।
❖उसे 25 वर्ष से कम उम्र का नहीं हाेना चाहिए।
❖उसे भारत में किसी संसदीय क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता होना चाहिए।
❖उसे भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के किसी लाभ के पद पर नही होना चाहिए।

संसद में विधयी प्रक्रिया : संसद में जो विधेयक पारित किए जाते हैं वे निम्नलिखित प्रकार के हाेते हैंः-

A सामान्य विधेयक
B धन विधेयक

A.सामान्य विधेयक : संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार सामान्य विधेयकों को किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।

❖ प्रथम वाचन : सदन में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप प्रेषित किया जाता है। अध्यक्ष के माध्यम से उस विधेयक पर पूर्ण वाद-विवाद तथा मतदान करवाया जाता है। इसके पश्चात यदि सदन द्वारा विधेयक की मंजूरी दे दी जाती है ताे यह माना जाता है कि प्रथम वाचन में यह विधेयक सदन द्वारा स्वीकृत कर लिया गया है।
❖द्वितीय वाचन : कुछ अवधि के पश्चात प्रस्तावक पुनः विधेयक को प्रस्तुत करता है। इस प्रस्तुति को द्वितीय वाचन कहा जाता है।

B.धन विधेयक : संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है।

❖ लोक सभा से पास होने के बाद धन विधेयक राज्य सभा के पास जाता है, जिसके पास चार विकल्प उपस्थित होते हैंः बिल को उसके मूल स्वरूप में पास करे, बिल को अस्वीकृत करे, चौदह दिन तक काेई कार्रवाई न करे, बिल को सुझावपरक संशोधनों के साथ लोक सभा में भेज दे।
❖ लोकसभा, राज्यसभा की किसी संस्तुति को अगर स्वीकृत कर लेती है तब यह स्पष्ट हाे जाएगा कि धन विधेयक राज्यसभा द्वारा संस्तुति किए गए एवं लोकसभा द्वारा स्वीकृत किए गए संशोधनों सहित पास कर दिया गया है।
❖राज्यसभा की किसी संस्तुति को अगर लोकसभा द्वारा स्वीकृत नहीं किया जाता है तो धन विधेयक राज्यसभा द्वारा सिफारिस किए गए किसी संशोधन के बिना उस रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित समझ लिया जाता है जिस रूप में वह लोकसभा द्वारा परित किया गया था।
❖धन विधेयक के लोक सभा एवं राज्य सभा से पारित होने के बाद इस बात का कोई प्रावधान नहीं है कि संसद की कोई संयुक्त बैठक बुलाई जाए। धन विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति अन्य बिलों को रोक सकता है लेकिन इस बिल को नहीं रोक सकता। (अनुच्छेद 111)

वित्त विधेयक : वित्त विधेयक उतना ही अच्छा हाेता है जितना कि अन्य विधेयक। वित्त विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना पेश नहीं किया जा सकता। वित्त विधेयक को केवल लोक सभा में ही पेश किया जा सकता है।

❖ इस प्रकार वित्त विधेयक एक सामान्य विधेयक के पारित होने के लिए उपलब्ध कराई गई सामान्य प्रक्रिया के अनुसार पारित होता है।
❖राजस्व एवं व्ययों से संबंधित कोई बिल, जोकि लोक सभा अध्यक्ष द्वारा धन विधेयक के रूप में प्रमाणित नहीं होता है, धन विधेयक कहलाता है।

वित्त विधेयक दो प्रकार के हाेते हैं :

1. बिल, जिसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित सामग्री उपलब्ध हो, लेकिन यह उन मामलों से मुख्यरूप से संबंधित न हो।
❖ एक बिल, जिसमें कर-निर्धारण उपधारा उपस्थित हो, लेकिन वह पूर्ण रूप से कर-निर्धारण के लिए प्रयुक्त न हो। इसे प्रथम श्रेणी का वित्त विधेयक कहते हैं।

2. एक सामान्य बिल में भारत के संगृहीत कोश से खर्च संबंधी प्रावधानों का समावेश रहता है। इसे द्वितीय श्रेणी का वित्त विधेयक कहते हैं।
संविधान संशोधन बिलः

संविधान का अनुच्छेद 368 संसद की उस शक्ति का उल्लेख करता है जोकि संविधान काे संशोधित करने के सन्दर्भ में है।

❖ इसके लिए यह बिल किसी भी सदन (लोक सभा या राज्य सभा) में प्रस्तुत किया जा सकता है।

लोकसभा का अध्यक्ष

❖ संविधान के अनुच्छेदः 93 के अनुसार एक नई लोक सभा के गठन के बाद राष्ट्रपति एक अध्यक्ष नियुक्त करता है जो सदन का वरिष्ठतम सदस्य होता है।
❖ अध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्य करने के लिए एक उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी की जाती है।
❖ अध्यक्ष लोकसभा का मुख्य संचालन अधिकारी होता है। किसी भी विषय को लेकर प्रस्तुत किया जाने वाला ‘कार्य स्थगन प्रस्ताव’ उसकी अनुमति से ही पेश किया जा सकता है।
❖ अध्यक्ष सदन की बैठकों की अध्यक्षता करता है। सदन में उसके निर्णय सर्वमान्य होते हैं वह विचाराधीन विधेयक पर बहस रुकवा सकता हैं।
❖ उसका यह उत्तरदायित्व होता है कि वह सदन के गौरव एवं प्रतिष्ठा को बरकरार रखे।
❖ उसे विभिन्न विधेयक व प्रस्तावों पर मतदान करवाना, परिणाम घोषित करना एवं मतों की समानता होने पर निर्णायक मत देने का अधिकार है।
❖ अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्ष के कर्तव्य का निर्वाह करता है।
❖ लोक सभा के भंग हाेने से लेकर नई लोक सभा के गठन तक अध्यक्ष कार्यालय सँभाले रहता है।
❖ अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को सदन के द्वारा एक प्रस्ताव पास करके बहुमत के साथ एवं चाैदह दिन की पूर्व सूचना देकर हटाया जा सकता है।
❖ मीरा कुमार लोक सभा की प्रथम महिला अध्यक्ष रहीं। (2009-2014 तक)
❖ जी॰ एम॰ सी॰ बालयोगी प्रथम अध्यक्ष थे, जिनका कार्यकाल के दौरान निधन हुआ।
❖ डॉ॰ बलराम जाखड़ देश के सबसे लम्बी अवधि तक काम करने वाले अध्यक्ष थे। (1980-1989 तक)
❖ श्री एम॰ ए॰ आयंगर लोक सभा के प्रथम उपाध्यक्ष थे। (1952-1956)
❖ जी॰ वी॰ मावलनकर लोक सभा के प्रथम अध्यक्ष थे।
❖ वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला है।

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