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RAJASTHAN HISTORY

मारवाड़ का इतिहास (History of Marwar)

मारवाड़ का इतिहास (History of Marwar)

❖ राठौड़ वंश :- सुर्य वंशी हिन्दू थे ।
❖ राठौडो की उत्पत्ति :- कन्नौज (गहड़वाल),दक्षिणी भारत (राष्ट्र कूट)

❖ राव सीहा :-


1. यह 1240 में कन्नौज से पालीवाल ब्राह्मणो की सहायता के लिए आया ।
2 . राजधानी खेड़ (बाड़मेर )
3. छतरी – बिठू (पाली)


❖ धुहड़ :

अपनी कुलदेवी नागणेशी माता (मंदिर – नागाणा बाड़मेर )की मूर्ति कर्नाटक से लाय।

❖ मल्लीनाथ :-

1. राजधानी मेवानगर बाड़मेर ।
2. मल्लीनाथ जी राज. के लोकदेवता है ।
3. बाड़मेर क्षेत्र को मालानी कहा जाता हैं ।
4. गणगौर पर गींदौली के गीत गाये जाते है ।

❖ चूंडा

1. प्रतिहारो ने अपनी राज कुमारी (इंद्रा ) की शादी चूंडा से की तथा मंडौर को दहेज में दिया |
2. राजधानी _ मंडौर

❖ जोधा :

1. 1459 में जोधपुर की स्थापना , जोधपुर में मेहरानगढ़ दुर्ग की स्थापना(नींव – कुंतीं माता द्वारा , चिड़ियाट्रक पहाड़ी पर )
2. आवल बावल की संधि :- 1453 जोधा v/s राणा कुम्भा

❖ मालदेव (1531-1562)

1. अपने पिता गंगा की हत्या करके राजा बना |
2. राजतिलक के समय मालदेव के पास 2 परगने थे | बाद में मालदेव ने 52 युद्ध तथा 58 परगने जीते थे |
❖ पाहेवा / साहेवा का युद्ध :- 1541 मालदेव और जैतसी (बीकानेर) के बीच (मालदेव विजय )
1. इस युद्ध मे जैतसी लड़ता हुआ मारा गया | मालदेव ने इस युद्ध मे बीकानेर पर अधिकार कर लिए |
2. जैतसी का पुत्र कल्याणमल सहायता के लिए शेरशाह सूरी के पास चला गया |
3. मालदेव ने मेड़ता पर भी अधिकार कर लिया तथा मेड़ता का राजा वीरमदेव शेरशाह सूरी के पास चला गया |

❖ मालदेव – हुमायूँ संबंध :-

1. हुमायूँ ने शेरशाह सूरी के खिलाफ सहायता के लिए जोगी तीर्थ से तीन दूत (अलका खां, मीरसमन्द,रायमल सोनी) भेजे |
2. मालदेव ने सकरात्मक उत्तर दिया तथा हुमायूँ को बीकानेर देने का वादा किया | लेकिन हुमायूँ विश्वास नही करता तथा अपने पुस्तकालयाध्यक्ष मुल्ला सुर्ख के कहने पर सिंध की तरफ चल जाता है |
3. हुमायूँ ने अमरकोट के राजा विरसाल सोढा के पास शरण ली |

❖ गिरी – सुमेल / जेतारण का युद्ध :- 1544 ई.

1. मालदेव(जेता ,कूंपा ,) और शेरशाह सूरी के बीच (शेरशाह सूरी विजय )
2. जलालखां जलवानी की सहायता से शेरशाह सूरी जीत गया |
3. शेरशाह सूरी ने कहा ” मैं मुठ्ठी भर बाजरे के लिये हिंदुस्थान की बादशाहत खो देता “|
4. शेरशाह सूरी ने जोधपुर पर अधिकार कर लिया तथा खवास खां को जोधपुर सौंफ दिया |
5. मालदेव सिवाना (बाड़मेर)(मारवाड़ के राठौडो की शरण स्थली ) चला गया |
6. थोड़े दिनों बाद मालदेव ने पुनः जोधपुर पर अधिकार कर लिया |
7. बारात का डेरा देखने जाते समय महिलाओ द्वारा गाया जाने वाला गीत – जला

❖ उमादे :-

1. मालदेव की पत्नी
2. जैसलमेर के लूणकरण भाटी की पुत्री
3. इसे रूठी रानी कहा जाता है |
4. भारमली नामक दासी की वजह से नाराज हो गई |

❖ दरबारी विद्वान :-

1. ईसरदास :- हाला – झाला री कुंडलिया (सुरसतसईं), देवीयाण, हरिरस |
2. आशानंद :- (i)उमादे भटियाणी र कवित ,(ii) बाघा – भारमली दुहा ,(iii) इन्होंने पाहेना के युद्ध मे भाग लिया था |
(iv) मालदेव ने जोधपुर का परकोटा बनाया |
(v) किले बनवाये सोजत ,मेड़ता,रिया , पोकरण (नागौर)
❖ उपाधियों :- हिन्दू बादशाह , हसमत वाला राजा – वैभव शाली राजा
2. मालदेव ने अपने बड़े बेटे राम व उदयसिंह को राजा नही बनाया तथा छोटे बेटे चन्द्र सेन को राजा बना दिया | दोनों अकबर के पास चले गए |

चन्द्रसेन 

❖ अकबर ने राम कि सहायता के लिए जोधपुर पर आक्रमण कर दिया | चंद्रसेन भाद्राजूण ( जालोर) चला गया |
❖ नागौर दरबार 1570:-
1. अकबर के नागौर दरबार मे चंद्रसेन ने भाग लिया |
2. अकबर को अपने बड़े भाई उदयसिंह के पक्ष में देखकर वापस चला गया |
3. अकबर ने भाद्राजूण पर आक्रमण कर लिया |
4. चंद्रसेन सिवाना चला गया |
5. चंद्रसेन ने आजीवन अकबर से संघर्ष किया | लेकिन उसकी अधीनता नही की |
6. 1581 में सारन की पहाड़ियों में सिंचियाई नामक गाँव मे मृत्यु हो गई |

उपाधियों :-

1. मारवाड़ का प्रताप
2. प्रताप का अग्रगामी
3. मारवाड़ का भूला – बिसरा राजा |

अकबर ने बीकानेर के रायसिंह को जोधपुर का प्रशासक बनाया था | (1572-1574)

❖ नागौर दरबार 1570

1. अकबर ने आयोजित किया |
2. अकाल राहत कार्यो के कारण

❖ वास्तविक कारण :- राज. के राजाओं को अधीनता स्वीकार करवाना |

❖ सामेला बारात का स्वागत करना |
❖ अधीनता स्वीकार की :-
1. कल्याणमल ( बीकानेर )
2. हरराज ( जैसलमेर )
3. उदयसिंह (चंद्रसेन का भाई)
4. इस समय अकबर ने नागौर में शुक्रतालाब बनवाया |

मोटाराजा उदयसिंह

❖ मारवाड़ का पहला राजा जिसने अकबर की अधीनता स्वीकार की |
❖ अपनी बेटी मानी बाई (जोधा बाई){उपाधि – जगत गुसाई ,बेटा – खुर्रम (शाहजहां )} की शादी जहांगीर से की |

❖ कल्ला रायमलौत:-

1. उदयसिंह के भाई रायमल का बेटा था |
2. यह सिवाना का सामन्त था |
3. 1590 में अकबर ने सिवाना पर आक्रमण किया |
4. कल्ला रायमलौत के नेतृत्व में सिवाना का दूसरा साका हुआ |
5. बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ ने कल्ला रायमलौत के मरसिये लिखे |

गजसिंह

❖ अनारा बेगम के कहने पर अपने छोटे बेटे जसवंत सिंह को जोधपुर का राजा बनाया | तथा बड़ा बेटा अमरसिंह को नागौर का राजा बनाया |
❖ अमरसिंह राठौड़( मतीरे की रॉड 1644) :-
1. छतरी – नागौर में (16 खंभो की )
2. अमरसिंह (नागौर ) v/s कर्णसिंह (बीकानेर )
3. अमरसिंह ने शाहजहां के दरबार मे उसके मिरबरसी सलावत को मार दिया था |
4. अमरसिंह को कटार का धणी कहा जाता है |
5. अमरसिंह की हत्या उसके साले अर्जुन सिंह गोड़ ने की |
6. आगरा किले के बुखारा दरवाजा को अमरसिंह दरवाजा कहा जाता है |शाहजहां ने इसे बंद करवा दिया था जिसे 1809 में जॉर्ज स्टील ने खुलवाया था |

जसवंत सिंह

❖ इसकी हांडी रानी जसवंत दे धरमत के युद्ध से हारकर वापस आने पर किले के दरवाजे बंद कर दिए थे |
❖ खजुआ के युद्ध में ओरंगजेब की तरफ से भाग लेता है लेकिन बाद में सूजा से मिल गया |
❖ ओरंगजेब ने जसवंतसिंह को काबुल का गवर्नर बनाया था |
❖ 1678 में जमरूद का थाना ( अफगानिस्तान ) में मृत्यु |
❖ ओरंगजेब ने कहा ” आज कुफ्र का दरवाजा टूट गया “|

❖ पुस्तके :-
1. आनंद विलास
2. भाषा भूषण
3. प्रबोध चंद्रोदय
4. अपरोक्ष सिध्दांत सार
❖ रानी जसवंत दे ने जोधपुर में राई का बाग महल बनवाया |

❖ दरबारी विद्वान्  :-

1. मुहणोत नैणसी:- नैणसी व उसके भाई सुन्दर दास ने जेल में आत्महत्या कर ली थी |मुंशी देवी प्रसाद ने राजपूताने का अबुल फजल कहा |
2. नैणसी री ख्यात ( राज, की पहली ख्यात) ,इसे मारवाड़ का गजट कहा जाता है | इस पुस्तक में जनगणना का वर्णन है |

❖ पृथ्वीसिंह :-

1. जसवंत सिंह का बेटा
2. इसने शेर के साथ लड़ाई की थी |
3. ओरंगजेब की जहरीली पोशाक से मृत्यु |
4. ओरंगजेब ने जसवंत सिंह के दो बेटो अजीतसिंह व दलथम्भन को दिल्ली के रूपसिंह राठौड़ की हवेली में नजरबंद कर दिया |
5. ओरंगजेब ने इंद्रसिंह राठौड़ (अमरसिंह राठौड़ का पोता ) 36 लाख रुपये लेकर जोधपुर का राजा बना दिया |
6. दुर्गादास राठौड़ मुकुंददास खींची व गौरा की सहायता से अजीतसिंह को जोधपुर लेकर आ जाता है |
7. गौरा को मारवाड़ की पन्नाधाय कहा जाता है |

❖ धुसो :-
1. मारवाड़ का राष्ट्रीय गीत
2. इसमें गौरा का नाम लिया जाता है |
3. गौरा की छतरी जोधपुर में है |

अजीतसिंह


❖ दुर्गादास राठौड़ ने अजीतसिंह को कालिंदी गांव में जयदेव पुरोहित के पास रखा |
❖ मेवाड़ के राजसिंह ने अजीतसिंह को समर्थन दिया |
❖ ओरंगजेब ने नकली अजीतसिंह का नाम मुहम्मदीराज रखा तथा अपनी बेटी जेबुनिसा को सौप दिया |
❖ राजसिंह तथा दुर्गादास राठौड़ ने ओरंगजेब के बेटे अकबर से विद्रोह करवा दिया | लेकिन अकबर दक्षिण भारत मे शम्भाजी के पास चला गया |
❖ बुलन्द अख्तर और सफियतु निस्सा :- अकबर के पुत्र -पुत्री थे | इनका पालन पोषण दुर्गादास राठौड़ ने किया |
❖ ईश्वरदास नागर की सलाह पर दुर्गादास ने इन्हें ओरंगजेब को सौप दिया |
❖ 1708 में अजीतसिंह जोधपुर का राजा बना |देवारी समझौता 1708 के बाद
❖ अजीतसिंह को राजा बनाने के लिये दुर्गादास ने 1678 – 1708 तक संघर्ष किया इसे मारवाड़ का तीस वर्जीय संघर्ष कहा जाता है |
❖ अजीतसिंह ने दुर्गादास राठौड़ को मारवाड़ से निष्कासित कर दिया |
❖ अजीतसिंह ने अपनी बेटी इन्द्र कंवर की शादी मुगल बादशाह फर्रुखसियर से की | यह अंतिम हिन्दू राजकुमारी थी जिसकी शादी मुगल बादशाह से की |
❖ अजीतसिंह की हत्या इसके बेटे बख्तसिंह ने कर दी |
❖ अजीतसिंह के अंतिम संस्कार में कुछ पशु – पक्षी जलकर मर गये थे |

❖ दुर्गादास राठौड़ :-


1. जन्म – सालवा (जोधपुर )
2. पिता – आसकरण
3. आसकरण ने दुर्गादास को लूणेवा की जागीर दी |
4. अजीतसिंह द्वारा निष्कासित किये जाने पर मेवाड़ के राजा अमरसिंह द्वितीय ने दुर्गादास राठौड़ को रामपुरा व विजय पुर गांव दिए |
❖ दुर्गादास की छतरी – उज्जैन (शिप्रा नदी के तट पर )

❖ उपाधियां :-
1. राठौडो का युलिसेस :- जेम्स टॉड द्वारा
2. राजपूताने का गैरीबाल्डी
3. मारवाड़ का अणविंधिया मोती

छप्पनीयां का अकाल – वि. सं. 1956(1899ई.)

अभयसिंह

❖ खेजड़ली घटना :-
1. भाद्रपद शुक्ल दशमी
2. वि. सं. 1787 (1730ई.)
3. अमृतादेवी विश्नोई के नेतृत्व में 363 लोग पेड़ों को बचाने के लिए शहीद हो गए |
4. जोधपुर में अमृतादेवी कृष्ण मृग पार्क |
5. 1904 अमृता देवी (प्रथम विजेता – गंगाराम विश्नोई )पुरस्कार
6. विश्व का एक मात्र वृक्ष मेला – खेजड़ली गाँव

❖ दरबारी विद्वान्  :-

1. करणीदान – सूरज प्रकाश ( बिड़द सिणगार)
2. वीरभाण- राजरूपक ( करणीदान और वीरभाण दोनों पुस्तको में अभयसिंह के अहमदाबाद आक्रमण का वर्णन है |

मानसिंह


❖ मानसिंह जब जालौर में था तो देवनाथ ने इसके राजा बनने की भविष्य वाणी की |
❖ जोधपुर में नाथ सम्प्रदाय के लिये महामंदिर बनवाया |
❖ मानसिंह ने नाथ चरित्र नामक पुस्तक लिखी |
❖ जोधपुर में मान पुस्तकालय बनवाया |
❖ 1818 में अंग्रेजों (EIC) से संधि |
❖ मारवाड़ का सन्यासी राजा कहा जाता है |

❖ दरबारी विद्वान  :-
1. कविराज बांकीदास – बांकीदास ख्यात , मान जसो मण्डन , कुकबी वतीसी, दातार बावनी |( गीत – आयो अंग्रेज मुल्क रे ऊपर )इस गीत में अंग्रेजों का साथ देने वाले राजाओ की आलोचना है |
❖ गिगोली का युद्ध 1807 :- मेवाड़ के इतिहास में पद लिया |

❖ जसवंत सिंह द्वितीय :- 1857 की क्रांति के समय शासक

❖ हनुमंत सिंह :- राजस्थान के एकीकरण के समय शासक।

 

1 Comment

  • क्रांति के समय मारवाड़ का शासक तख्त सिंह था, जसवंत सिंह ii नहीं था
    नोट्स अच्छे बनाए हैं
    थैंक्स

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