भारतीय न्यायपालिका

सर्वोच्च न्यायालय

❖ भारत के संविधान के अंतर्गत एवं संवैधानिक पुनरावलोकन के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय भारत का सर्वोच्च न्यायाधिकरण है एवं यह अपील करने का अंतिम न्यायालय है।
❖ इसमें सर्वोच्च न्यायाधीश के साथ 30 अन्य न्यायाधीश सम्मिलित रहते हैं।
❖ इसके पास मूल, पुनर्विचार संबंधी एवं परामर्शदात्री अधिकारिता होती है।
❖ एक डिविजन बेंच में दो से तीन न्यायाधीश सम्मिलित रहते हैं। एक संवैधानिक बेंच में पाँच या पाँच से ज्यादा न्यायाधीश सम्मिलित रहते हैं।

कार्यकाल, योग्यता एवं वेतन :

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति संघ के मंत्रिमंडल की सलाह से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इसके लिए आवश्यक योग्यताएँ हैंः

❖ भारत का नागरिक जो किसी उच्च न्यायालय अथवा दो या दो से अध्कि न्यायालयों में लगातार कम से कम 05 वर्ष तक न्यायाधीश रह चुका हो।
❖ उच्च न्यायालय में लगातार 10 वर्षों की अवधि तक कार्य कर चुका अधिवक्ता।
❖ राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित वकील।
❖ सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पैंसठ वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। यह उच्च न्यायालय के न्यायाधीशाें की सेवानिवृत्ति उम्र से 3 वर्ष अधिक है। इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश, जोकि एक उच्च न्यायालय से पदोन्नत होकर आता है, सर्वोच्च न्यायालय में कम से कम 3 वर्ष की अवधि तक अधिक काम करता है।
❖ संसद का अनुच्छेद 125 भारतीय संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन एवं दूसरे भत्तों का निर्धारण करे।
❖ संसद इन प्रावधानाें या अधिकारों में काेई ऐसा परिवर्तन नहीं करेगी जाे उनके लिए अलाभकारी हो। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को ₹ 90,000 मासिक वेतन एवं मुख्य न्यायाधीश को ₹ 100,000 मासिक वेतन मिलता है।
❖ टी.एस. ठाकुर भारत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश हैं।
❖ महाभियोग : सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश संविधान की सीमा के अंतर्गत प्रमाणित दुर्व्यवहार या अक्षमता की स्थिति में ही हटाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति के आदेश की जरूरत होती है। लाेकसभा के 100 सदस्याें द्वारा हस्ताक्षरित या राज्य सभा के 50 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित एक नोटिस को प्रत्येक सदन में 2/3 बहुमत के द्वारा पारित कराया जाता है।

अधिकारिता

उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिताः

संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत

(¡) भारत संघ तथा एक या एक से अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न विवादाें में।
(¡¡) दाे या अधिक राज्य या विभिन्न राज्यों के मामलों के संदर्भ में,

सर्वोच्च न्यायालय के पास विशिष्ट आरंभिक अधिकारिता होती है।

❖ पुनर्विचार संबंधी अधिकारिता : संविधान का अनुच्छेद 132 पुनर्विचार संबंधी अधिकारिता से संबद्ध है। सर्वोच्च न्यायालय देश का सबसे बड़ा न्यायालय है। इसकी अधिकारिता में संवैधानिक मामले, सिविल मामले एवं आपराधिक मामले सम्मिलित रहते हैं।
❖ सर्वोच्च न्यायालय की प्रथम महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति फातिमा बीबी थीं (सन् 1987 मे )।
❖ सर्वोच्च न्यायालय की द्वितीय महिला न्यायाधीश ग्यान सुधा मिश्रा थीं (सन् 2010 में)।
❖ भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश एच॰ जे॰ कानिया थे।
❖ सबसे छोटा कार्यकाल के॰ एन॰ सिंह का रहा (25 नवंबर, 1991-12 दिसंबर, 1991 तक)।
❖ सलाहकारी अधिकारिताः सर्वोच्च न्यायालय के पास उन मामलों में विशेष सलाहकारी अधिकारिता रहती है जिन्हें भारत का राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 143 के द्वारा इंगित करता है।
❖ सुप्रीम काेर्ट दस्तावेजाें का एक न्यायालय है।
❖ संविधान के अनुच्छेद 139 (A) के अनुसार (44 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए)

सर्वोच्च न्यायालय एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में मामले को स्थानान्तरित कर सकता है, यदि इन मामलों से कानून पर महत्त्वपूर्ण प्रश्न चिह्न लगते हैं।

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक :

❖नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सी॰ ए॰ जी॰) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 के अधीन की जाती है। उसे उसके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जाएगा जिस रीति से एवं जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
❖ सी॰ ए॰ जी॰ भारत सरकार या राज्य सरकार के व्ययों के खातों के लेखा परीक्षण करने के लिए उत्तरदायी होता है। सी॰ ए॰ जी॰ यह सुनिश्चित करता है कि धन न्यायसम्मत रूप से एवं वैधानिक रूप से व्यय किया जाए एवं वित्तीय अनियमितताओं की भी जाँच की जाए।
❖ नियंत्रक महालेखा परीक्षक को सार्वजनिक धन का संरक्षक माना जाता है।
❖ सी॰ ए॰ जी॰ का कार्यकाल 06 वर्ष एवं सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है।
❖ भारत के प्रथम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक वी॰ नरहरि राव थे।

भारत का महान्यायवादी
❖ संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत का महान्यायवादी सरकार का मुख्य विधिक सलाहकार हाेता है। वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय में प्राथमिक अधिवक्ता होता है।
❖ भारत के प्रथम महान्यायवादी एम॰ सी॰ सेतलवाड़ थे।
❖ भारत के महान्यायवादी का वेतन ₹ 90,000 प्रतिमाह है।
❖ भारत के महान्यायवादी को भारत के राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्त किया जाता है। वह तब तक अपने पद पर रहता है जब तक राष्ट्रपति चाहता है।
❖ वह सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है।
❖ महान्यायवादी भारत सरकार को ऐसे मामलों में राय देता है जो वैधानिक हों। इसके साथ ही साथ वह राष्ट्रपति के द्वारा प्रदत्त वैधानिक कर्तव्यों के पालन के लिए भी उत्तरदायी होता है।
❖ महान्यायवादी को भारत के राज्य क्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है।
❖ मुकुल रोहतगी भारत के वर्तमान पदग्राही महान्यायवादी हैं।

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