Maharana Pratap : महाराणा प्रताप का जीवन परिचय

Maharana Pratap : महाराणा प्रताप (1572-1597) मेवाड़ के प्रतापी शासकों मे से सबसे शक्तिशाली शासक। आपका जन्म 9 मई 1540 कुम्भलगढ़ दुर्ग के कटारगढ़ में हुआ था।आपने मेवाड़ धारा पर 25 वर्ष तक शासन किया।

Maharana Pratap
Maharana Pratap

Maharana Pratap( महाराणा प्रताप)

❖ 25 साल शासन 
❖ पत्नी – अजब दे पंवार
❖ जन्म 9 मई 1540 कुम्भलगढ़
❖ पिता – उदय सिंह , माता – जयंता बाई सोनगरा।
❖ प्रताप के बचपन का नाम – कीका
❖ उदय सिंह के छोटे बेटे जगमाल को राजा बना दिया ।
❖ प्रताप का राजतिलक कृष्णदास चूंडावत (सलूम्बर ) ने गोगुन्दा में किया होली के दिन।
❖ प्रताप का विधिवत राजतिलक कुम्भलगढ़ में हुआ ।
❖ मारवाड़ का चंद्र सेन भी इस राजतिलक में शामिल था ।
❖ अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार दूत भेजे –

1. जलाल खां कोरची 1572 ,

2. मानसिंह  1573

3. भगवंत दास – 1573 

4. टोडरमल 1573

हल्दी घाटी का युद्ध

❖ 18 जून 1576 (महाराणा प्रताप और अकबर के बीच )
❖ अकबर के सेनापति – मानसिंह (पहली बार सेनापति,हाथी मर्दाना ) व आसफ खां
❖ प्रताप के सेनापति- 1. सलूम्बर- कृष्णदास चुंडावत
2. ग्वालियर – रामसिंह तोमर
3. अफगान मुस्लिम – हाकिम खां सूर पठान
4. भीलो का नेता – पुंजा भील
❖ मिहत्तर नामक मुस्लिम सैनिक ने अकबर के आने की झूठी सूचना दी।
❖ युद्ध में चेतक घायल हो गया तो राणा प्रताप युद्ध भूमि से बाहर चला गया।
❖ झाला मान (बीदा)ने युद्ध का नेतृत्व किया ।
❖ मानसिंह प्रताप को अधीनता स्वीकार नहीं करा सका। अकबर ने मानसिंह तथा आसफ का दरबार मे नजराना बंद करवा दिया ।
❖ चेतक की छतरी – बलीचा (राजसमंद)
❖ इतिहासकार : हल्दी घाटी युद्ध का नाम :-
1. अबुल फजल : खमनोर का युद्ध
2. बदायुनी : गोगुन्दा का युद्ध
3. जेम्सटॉड : मेवाड़ की थर्मोपॉली
4. आदर्श लाल श्री वास्तव : बादशाह – बाग का युद्ध
❖ मुगल सेना के हाथी :- मर्दाना , गजमुक्ता
❖ मेवाड़ की सेना के हाथी :- लूणा , राम प्रसाद ,वीर प्रसाद ,
❖ 1577 में अकबर में खुद मेवाड़ आक्रमण किया और उदयपुर का नाम बदल कर मुम्मदाबाद कर दिया।

कुम्भलगढ़ का युद्ध


❖1. तीन बार आक्रमण 1577, 1578 व 1579
2. मुगल सेनापति शाह बाज खां ने तीन बार आक्रमण किया और कुम्भलगढ़ पर अधिकार कर लिया ।
❖ शेरपुर की घटना :- 1580
1. अमरसिंह ने मुगल सेनापति रहीम की बेगमो को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन प्रताप ने उँन्हे ससम्मान वापस पहुँचाया।

दिवेर का युद्ध

❖ :- 1582 ई.(प्रताप की विजय)
1. प्रताप ने मुगल सेना को हरा दिया । अमर सिंह ने मुगल सेनापति सुल्तान खां को मार दिया
2. इस युद्ध मे बांसवाड़ा, प्रतापगढ़,ईडर आदि रियासयो ने प्रताप का साथ दिया । जेम्स टॉड ने इस युद्ध को मेवाड़ का मैराथन कहा।
❖ 1585 में जगनाथ कछवाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया। यह अकबर की तरफ से अंतिम आक्रमण था।
❖ प्रताप ने मालपूरा (टोंक ) पर आक्रमण किया और जीत लिया तथा नीलकंठ महादेव मंदिर बनवाया।
❖ प्रताप ने चावंड को राजधानी बनाया।
❖ चावंड में चामुंडा माता का मंदिर बनवाया।
❖ चावंड से मेवाड़ की चित्रकला प्रारम्भ हुई । मुख्य चित्रकार नासिरूद्दीन

दरबारी विद्वान


1. चक्रपाणि मिश्र – पुस्तक – (i) राज्याभिषेक (ii) मुहूर्तमाला (iii) विश्व वल्लभ ( उद्यान विज्ञान के बारे में )
2. हेमरत्न सूरी :- गौरा बादल री चौपाई
3. सदुलनाथ त्रिवेदी :- इसे प्रताप ने मंडेर की जागीर दी । यह जानकारी उदयपुर अभिलेख 1588 में मिलती है।
4. भामाशाह और ताराचंद :- राणा प्रताप की आर्थिक सहायता की।
5. माला सांदू
6. रामा सांदू

❖ प्रताप ने चितौड़गढ़ व मांडलगढ़ को छोड़कर पूरा मेवाड़ जीत लिया था।


❖ 19 जनवरी 1597 में चावंड में राणा प्रताप की मृत्यु ।

❖ प्रताप की छतरी – 8 खंभो की छतरी (बांडोली , उदयपुर )

❖ महाराणा प्रताप को मेवाड़ केसरी कहा जाता है।

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